जानिए आँखों के रोग, लक्षण, कारण और आयुर्वेदिक उपाय
आँखें शरीर का सबसे कोमल भाग हैं। कहते हैं आँखें हैं तो जहान है। ये आँखें ही हैं जिनकी वजह से हम प्रकृति की सुंदरता का आनंद ले सकते हैं, अद्भुत दृश्य निहार सकते हैं। लेकिन यही आँखें किसी रोग का शिकार हो जाएँ, और Eyesight कम या दिखना बंद हो जाये, तो बड़ी समस्या खड़ी हो जाती है। आँखों के प्रमुख रोग, लक्षण और कारण: Eye Diseases की बात करें तो केवल बड़े ही नहीं आज-कल छोटे-छोटे बच्चे भी Eye problems से जूझ रहे हैं। एक जानकारी अनुसार, भारत में वर्तमान में लगभग 6.2 करोड़ (62 मिलियन) से अधिक लोग मोतियाबिंद, काला मोतिया, सूखी ऑंखें, दृष्टिदोष, नज़र कमज़ोर होना जैसे किसी न किसी प्रकार के आंखों के रोग से जूझ रहे हैं। नज़र कमज़ोर होना (Weak Eyesight): स्क्रीन पर अधिक समय बिताना, पोषण की कमी, जेनेटिक कारण, बढ़ती उम्र इत्यादि नज़र कम होने के मुख्य कारण हैं। केवल बढ़ती उम्र में ही नहीं, बहुत कम उम्र के बच्चों को भी आज कल चश्मे लगे हुए हैं। दुनिया भर में स्कूल जाने वाले बच्चों में से 20% से 25% बच्चों को, कमज़ोर नज़र के चश्मे लगे हुए हैं। दृष्टिदोष (Refractive errors): इस स्थिति में आँख की लंबाई या कॉर्निया/लेंस की आकृति में बदलाव के कारण प्रकाश की किरणें रेटिना पर ठीक से केंद्रित नहीं हो पातीं और दूर या पास की वस्तुएँ धुंधली दिखना, सिरदर्द, आँखों में थकान जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। कंजंक्टिवाइटिस (आँख आना): वायरस, एलर्जी, प्रदूषण, धूल-मिट्टी इत्यादि की वजह से कंजंक्टिवाइटिस की समस्या आती है। जिससे आँख लाल होना, पानी आना, खुजली, जलन, चिपचिपा स्राव जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। सूखी ऑंखें (Dry eyes): सूखी आँखें तब होती हैं, जब आँसू कम बनते हैं या जल्दी सूख जाते हैं। इससे कई बार धुंधला दिखने लगता है और जलन होने लगती है। इसके मुख्य कारण स्क्रीन का अधिक उपयोग, कुछ दवाएँ इत्यादि हो सकते हैं। मोतियाबिंद (Cataract): मोतियाबिंद की बात करें तो यह एक ऐसी समस्या है जिसमें रोशनी के चारों ओर घेरे दिखने लगते हैं, धुंधला दिखाई देता है और रात में कम नज़र आता है। इस रोग के मुख्य कारण उम्र बढ़ना, मधुमेह, आँख में चोट, लंबे समय तक कुछ दवाओं का उपयोग इत्यादि होते हैं। काला मोतिया (Glaucoma): काला मोतिया की दिक्क्त तब आती है, जब आँख के अंदर दबाव बढ़ता है या ऑप्टिक नर्व को नुकसान पहुँचता है। इस समस्या में, शुरुआत में अक्सर कोई लक्षण नहीं दिखते, बाद में दृष्टि का क्षेत्र कम होना, तेज दर्द/लाल आँख जैसे लक्षण सामने आते हैं। आँखों के रोगों के लिए आयुर्वेदिक उपचार (Ayurvedic Treatment for Eye Diseases): आयुर्वेद प्राचीन समय से ही हर रोग के उपचार के लिए प्रभावी माना गया है। अगर आँखों की समस्याओं की बात करें तो, इनके उपचार के लिए आयुर्वेद की दो थेरेपियाँ नेत्र तर्पण और नास्य थेरेपी प्रमुख मानी गई हैं। नेत्र तर्पण: आयुर्वेद के अनुसार, 'नेत्र' का अर्थ आँख और 'तर्पण' का अर्थ पोषण है अर्थात आँखों को पोषण देना। इस प्रक्रिया में आँखों के चारों ओर उड़द या जौ के आटे से एक मजबूत घेरा (बाउंड्री) बनाया जाता है। इसके बाद इसमें गुनगुना औषधीय घी (जैसे त्रिफला घृत) भरा जाता है, जिससे आँखें उस घी में डूबी रहती हैं। रोगी को धीरे-धीरे आँखें खोलने और झपकाने के लिए कहा जाता है ताकि घी अंदर तक पहुँचे। समय: यह प्रक्रिया लगभग 20 से 30 मिनट तक की जाती है। मुख्य लाभ:- सूखापन दूर करना: आँखों का अत्यधिक सूखापन (ड्राय आई सिंड्रोम) और जलन कम होती है। दृष्टि सुधार: आँखों की रोशनी और देखने की स्पष्टता में सुधार होता है। तनाव से राहत: स्क्रीन टाइम, थकान और प्रदूषण के कारण आँखों में होने वाले तनाव व भारीपन दूर होता है। पोषण: ऑप्टिक नसों और आँख के अंदरूनी ऊतकों को गहराई से पोषण देती है और मजबूती प्रदान करता है। नास्य थेरेपी: "नासा हि शिरसो द्वारं।" इसका अर्थ है कि नाक ही सिर (मस्तिष्क और इंद्रियों) का प्रवेश द्वार है। नस्य थेरेपी में नाक में औषधीय तेल, घी या रस डाला जाता है। यह थेरेपी आंखों के रोगों के इलाज में बेहद प्रभावी मानी जाती है। मुख्य लाभ:- यह थेरेपी आँखों की एलर्जी, कमज़ोर नज़र, आँखों के भारीपन और थकान को दूर करने में कारगर काम करती है। आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों से बना Netra Shodhak Vati भी आँखों के रोगों में राहत दिलाने का काम करता है। आँखों का रोगों से कैसे करें बचाव: 1. डिजिटल स्क्रीन से सुरक्षा: आजकल मोबाइल, लैपटॉप या टीवी के सामने लंबा समय बिताने से आँखों में सूखापन (Dry Eyes) और थकान बढ़ जाती है। स्क्रीन देखते समय बार-बार अपनी पलकें झपकाएं, जिससे आँखों में नमी बनी रहे। टीवी और मोबाइल को देखते समय सही दूरी बनाकर रखें। 2. स्वच्छता का ध्यान रखें: संक्रमण और कंजंक्टिवाइटिस (आँख आना) जैसी बीमारियों से बचने के लिए स्वच्छता सबसे पहला कदम है। इलसिए आँखों को बार-बार न छुएं। बिना हाथ धोए आँखों को छूने या रगड़ने से उंगलियों के बैक्टीरिया आँखों में जा सकते हैं। 3. धूप और धूल-मिट्टी से बचाव: धूप में निकलते समय हमेशा ऐसे धूप के चश्मे पहनें जो 99% से 100% UVA और UVB किरणों को रोकते हों। सूरज की हानिकारक किरणें मोतियाबिंद का कारण बन सकती हैं। 4. पोषक तत्वों से भरपूर आहार: आँखों की रोशनी बनाए रखने और बीमारियों को दूर रखने के लिए सही खान-पान बहुत मायने रखता है: पालक, मेथी और ब्रोकली जैसी सब्जियों में ल्यूटिन (Lutein) और ज़ेक्सैंथिन (Zeaxanthin) एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो रेटिना की रक्षा करते हैं। आंवला, संतरा, पपीता और सूखे मेवे (जैसे बादाम) को अपनी डाइट में शामिल करें। अखरोट, अलसी के बीज का सेवन आँखों के सूखेपन को कम करता है। आँखें प्रकृति का दिया हुआ खूबसूरत तोहफा है। आप इस रंगीन दुनिया का आनंद ले सकें, इसलिए अपनी आँखों का पूरा ध्यान रखें। क्योंकि रोग से ग्रसित आँखों से इस प्रकृति की खूबसूरती का आनंद नहीं लिया जा सकता। Read more...